दिवाली प्रैंक मजेदार हिंदी कहानी || हिंदी कहानी || मजेदार कहानी

 



दिवाली प्रैंक मजेदार हिंदी कहानी

एक गांव में सतीश नाम का आदमी रहता था | उसकी बीवी का नाम संध्या था और बेटे का नाम कृष था सतीश बहुत दुबला था जिसकी वजह से उसके पड़ोसी पन्नालाल उसे चिड़ाया करता था | सतीश साइकिल पर बैठता तो पन्नालाल पीछे बैठ जाता था और अपने पैरों से रोक देता था जिससे साइकिल नहीं चलाया जाता तब पन्नालाल बोलता था |



पन्नालाल

ए सुतले साइकल जितना तेरा वजन नहीं है तू क्या साइकल चलाएगा |



वह ऐसा ही कहता था और आस पड़ोस के लोग हंसा करते थे पन्नालाल जानबूझकर अपनी गली पर काम करता था जब लोग उसके डोले शोले देखकर तारीफ करते थे तो वह बहुत खुश होता था | पन्नालाल अपने घर के सारे कूड़ा कचरा लाके सतीश के घर के सामने फेंक दिया करता था और कहता था |


पन्नालाल

देख क्या रहा है मारेगा मुझे तो आ आजा ?



सतीश बेचारा सर झुका के अंदर चलाता था इसको पन्नालाल पर बहुत गुस्सा था | इस साल दीपावली आया सतीश का परिवार अपने घर के बाहर फुल झरिया जलाने लगा | और इधर कृष रॉकेट उड़ा रहा था इतने में पन्नालाल की बेटी मीना अपने मां को बोली |



मीना

डैडी हर वक्त करते हैं दीपावली के दिन बाहर ही नहीं निकलते और सब के पापा को देखो अनार बम रॉकेट सब पढ़ रहे हैं | मुझे यह फुल झरिया नहीं चाहिए मैं पापा के साथ आज बम फोड़ दूंगी |



       इतना कहकर मीना फूट-फूट कर रोने लगी मीना को रोते देखकर मीना की मां घर के अंदर चली गई और अपने पति से बोली |



मीना की मां

और मेरे से नहीं हो रहा है आज आपको बाहर आकर बम फोड़ना ही पड़ेगा | कहते हैं कि त्यौहार के दिन बच्चों को रुलाना नहीं चाहिए वैसे भी आप इतने बड़े पहलवान एक छोटे से बम से डरता है |



          यह कहकर वह अपने पति को खींच कर ले गई पन्नालाल के एक बड़े से लकड़ी के कोने में रॉकेट बांदा और डरते डरते उसने उस रॉकेट में आग जलाने की कोशिश की लेकिन हर बार वह आगे बढ़ता था और फिर से पीछे आ जाता था | उसके बाद बहुत मुश्किल से वह रिश्ते से रॉकेट को जलाने ही वाला था | किक कृष उसके पीछे से आया और करके शक्ल का पंप दबा दिया | पन्नालाल बाप रे चिल्लाकर पीछे गिर गया | पन्नालाल फिर से उठा और इस बार एक बहुत बड़े लकड़ी मैं अगरबत्ती को बांधा और बम को जलाने की कोशिश करने लगा |किस फिर से चुपके से उसके पीछे चला गया और एक छोटी सी बम को फोड़ दिया बम के फटते ही पहलवान ने आवाज लगाया मर गया मर गया जिला के उड़ने लगा | 



               यह देखकर आस-पड़ोस के लोग जोरो जोरो से हंसने लगे कितने में खरीद में 500 वाला लड़ी को जला दिया उसके बाद पहलवान मैं मर गया मैं मर गया चिल्लाते चिल्लाते गली में दौड़ने लगा | और सारे गली के लोग हंस हंस कर लोटपोट हो गए | दूसरे दिन पहलवान पन्नालाल गली में से चलकर जा रहा था तभी एक बच्चा पीछे से आकर बूम कहकर चिल्लाता है और पन्नालाल फिर से डर गया और सारे लोग हंस पड़े |



कालिया

अरे क्यों भाई बड़ी पहलवानी दिखाते रहते हो तुम तो बच्चों से भी डरपोक निकले भाई |



       पन्नालाल श्रम से अपना सर झुका लिया दूसरे ही दिन पन्नालाल अपना घर खाली कर कर चला गया उसके बाद सतीश और उसके परिवार वाले बहुत खुश हुए |





🔗All Meterial 


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