मोटरसाइकिल चोर मजेदार
कमलपुर नाम के गांव में रितेश और हितेश नाम के दो दोस्त रहते थे | दोनों का उस गांव में बहुत अच्छा नाम था | उनके पास एक वाइन भी था | दोनों जहां भी जाते थे वह उस वन को साथ लेकर जाते थे | एक बार उसी गांव में राजू नाम का एक व्यक्ति नौकरी ढूंढते ढूंढते आ रहा था तभी गांव के किसी व्यक्ति ने रितेश और गीतेश के पास भेजा | राजू भी यह सोच कर चला गया की रितेश और जितेश बिजनेस करते हैं |
राजू
भाई आप कौन सा बिजनेस करते हो भाई सुबह घर में रहते हो और रात में काम में जाते हो और आप जहां भी जाते हो इस वन को अपने साथ ही लेकर जाते हो |
रितेश
अरे भाई हमारा इंपोर्ट और एक्सपोर्ट का काम है भाई इधर का माल उधर और उधर का माल इधर किया करते हैं समझ में नहीं आया ना मैं फिर से बताता हूं इधर का माल भरकर थे और उधर का माल इधर करते हैं ठीक से समझ में नहीं आया क्या ?
राजू
हां हां भाई समझ मैं आ गया और बताने की जरूरत नहीं है आप इधर का माल उधर करते हैं और उधर का माल इधर करते हैं और आपका काम तो बहुत अच्छा है भाई अगर आपके पास मेरे लिए कुछ काम हो तो बोल सकते हो ना भाई मैं भी आपकी तरह काम करना चाहता हूं |
गीतेश
देखो भाई हम जो करते हैं वह मामूली काम नहीं है तुम जैसे पहले गए रे लोग इस काम को नहीं कर सकते तुम यहां से चले जाओ हमें बहुत से काम है और पहले ही हम बहुत बिजी हैं |
यह सुनकर राजू को अपमानित महसूस हुआ उस रात रितेश ने जितेश को
रितेश
क्यों भाई टाइम हो गया क्या चलो चलते हैं ड्यूटी में लगने का टाइम हो गया है |
यह कहकर दोनों उस वन में निकल गए जब वही रास्ते से जा रहे थे तब उन्हें रास्ते पर खड़ी एक बाइक दिखाई देती है | फिर जितेश में 1 को वहां पर रोका दोनों धीरे से उस्मान के दौर को खोल कर उतरे और धीरे से पूछ बाइक को उसमें में चढ़ा दिया फिर दोनों सिटी के लिए निकल गए | वहां सिटी में पहुंचकर वहां पर उस बाइक को बेचकर पैसे लेते हैं फिर वह अगले दिन सुबह वापस आते हैं|
तब गांव वाले किसी को पकड़कर मार रहे थे जितेश ने यह देखकर वाहन को वहां पर रोका और दोनों वहीं से उतरे फिर दोनों उन लोगों के पास गए फिर रीतेश ने उन लोगों में से एक से पूछा
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