शरारती रमेश का सबक
किसी गांव में रमेश नाम का एक बेकार आदमी रहता था | वह कोई भी काम नहीं करता था और दूसरों को सताया करता था | दिवाली के आते ही गणेश लोगों को और ज्यादा परेशान करता था | बच्चे जब छोटे-छोटे बम होते तो बच्चों के पीछे वाह बड़ा सुथली बैंक वह फोड़ दिया करता था | और वैसे भी बच्चे डर जाते थे और रमेश उन बच्चों को डरते देख कर उन बच्चों को चिड़ाया करता था | उसके बाद भी रमेश शांत नहीं बैठता था वह बड़े-बड़े रॉकेट को जलाकर उन बच्चों के ऊपर छोड़ दिया करता था | फिर सभी बच्चे अपने अपने माता-पिता को जाकर इसके बारे में शिकायत की तब उन बच्चों के माता-पिता ने गांव के सरपंच से जाकर रमेश की शिकायत की खीर गांव के सरपंच ने पंचायत बैठाई और रमेश को पंचायत में बुलाया गया |
सरपंच
क्यों रमेश तुम्हारे बहुत शिकायत आ रही हैं | और तुम सभी को सताकर बहुत मजा आता है | भले ही तुम्हें यह मजाक लग रहा है पर दूसरों को कितनी परेशानी होती हैं जानते हो तुम तो| तुम्हारी वजह से लोगों ने दिवाली को ध्यान से मनाते हैं की तुम ना जाने कहां से आकर उनके पीछे बम लगा दो अब से यह हरकत बंद कर दो वरना तुम्हें इस गांव से निकालना होगा ध्यान रहे |
रमेश
क्या कहां मुझे इस गांव से निकालोगे इतनी हिम्मत तुम्हें से किसी में है क्या | वैसे भी इतने छोटे-छोटे पटाखों से डरने वाले लोग बाहर आकर क्यूं दिवाली बनाएं भला | भजन कर सकते हैं ना | इंसान को धैर्य से कहना पड़ता है ऐसे छोटे-छोटे पटाखों से डरना तो खीर जीना ही बेकार है | आखिर तुम सब को मुझे देखकर कुछ सीखना चाहिए मुझ में जो हिम्मत है वो अगर आप लोगों में 10 प्रतिनिधि होता तो अच्छा होता बेचारे लोग वैसे आप लोगों को जो करना है वह कर लो मैं तो नहीं बदलने वाला |
यह कहकर पंचायत से चला गया पंचायत में जो लोग थे सभी ने सर पकड़ लिया | एक दिवाली पर एक हरी राम नाम का फुलझड़ी जाने वाला था | इसलिए मैं रमेश वहां आकर उसके पीछे सुतली बम लगा दिया | यह देखकर दूर से हरीराम का पोता चिंटू |
चिंटू
नहीं रुको नहीं दादा जि ओ हार्ट पेशेंट है |
यह चिल्लाया रमेश नागौर किए बिना को जला दिया फिर वह बंबू से फट गया और यह आवाज से डरकर श्री राम को दिल का दौरा पड़ा और वह गिर गया | यह देख कर चिंटू एंबुलेंस को कॉल किया पूछ लो के बाद चिंटू अपने फ्रेंड से बोला |
चिंटू
अरे भाई पिंटू वह हमारे गांव में रमेश है ना उसकी शरारते कुछ ज्यादा ही हो रहे हैं | पिछले हफ्ते मेरे दादाजी बड़े किस्मत से बच गए थे | वरना मेरा क्या होता मेरे दादाजी के अलावा तो मेरा इस दुनिया में और कोई भी नहीं है | मैं इसी लिए उसे सबक सिखाना चाहता हूं क्या तुम उसे सबक सिखाने में मेरी मदद करोगे |
पिंटू
हां सच में भाई उसकी वजह से मेरी बहन छोटे-छोटे पटाखे से भी डर रही है और फोड़ना भी बंद कर दिया है | मैं तुम्हारा साथ तो देना चाहता हूं लेकिन हम क्या कर सकते हैं | हम तो छोटे से बच्चे हैं |
पिंटू ने चिंटू के कान में कुछ कहा अगले दिन किंतु जब रमेश जा रहा था उसे रोककर कुछ कहने लगा |
पिंटू
भैया सुनना है कि आप बलून बहुत बड़ा खुला सकते हैं यह सच है क्या ?
रमेश
हां कुछ दिन पहले मैंने एक बलून फूफा वह अच्छे से बड़ा होकर धर्म से फट गया | और यह आवाज सुनकर गांव में जो पंछी थे वह उड़ गए इतना अच्छा और बड़ा खुला सकता हूं मैं बलून |
पिंटू
वह तो भैया तो आप मेरे लिए एक बलून फुला कर दोगे मैं उस बलून से खेलूंगा |
यह कहते हुए पिंटू ने रमेश को एक बलून लिया रमेश उस बलून में हवा फूक रहा था |
पिंटू
रुके भैया ध्यान से फूट गया तो मैं डर कर मर ही जाऊंगा |
रमेश
चुप रहो कुछ भी नहीं होगा बस तू मेरा गुब्बारे को फुलाना देखो और नहीं तो क्या |
यह कहकर फिर से उस गुब्बारे में हम आप बुलाने लगा इतने मैं चिंटू वहां आकर उसके पीछे एक सुतली बम रखा | रमेश बलून को बहुत बड़ा फुला दिया और इधर चिंटू मॉम को जला दिया फिर पिंटू रमेश से कहने लगा कि बस बस बलून बस इतने ही वाला है | केकर पिंटू अपने कान को बंद कर दिया और बम और बलून दोनों एक साथ फटे यह सुनकर रमेश बाप रे चिल्ला कर गिर गया और रमेश बेहोश हो गया | उस दिन से रमेश को आवाज और शोर-शराबे से डर लगने लगा | रमेश जब गली में चलते हुए जब जाता था तब वह कोई भी आवाज सुनकर वह डर जाया करता था | और तभी से दिवाली के दिन कान बंद कर कर अपने घर में ही रहा करता था | फिर दिवाली के कुछ दिन बाद गांव के लोगों ने चिंटू और पिंटू को शुक्रिया अदा किया |
Fonts 👇
