तरबूज शरबत वाला हिंदी कहानी || मजेदार कहानी || किसान और बिजनेसमैन की कहानी





तरबूज शरबत वाला

धामपुर नाम के गांव में सूरज और चंदा नाम के पति पत्नी रहते थे वह दोनों मेहनत करके अपने खेत में कई तरह के फल उड़ाया करते थे उसी गांव में काली नाम का एक रियल स्टेट व्यापारी रहता था वह बहुत लालची था वह गांव के भोले भाले किसान गांव वालों को वह खाकर वह उनकी जमीन खरीद लिया करता था | और उस जमीन को शहर के बिजनेसमैन लोगों को महंगे दामों पर बेचा करता था | 1 दिन सूरज और चंदा अपने खेत में काम कर रहे थे कालिदास वहां पहुंचा और बोला |



कालिदास

क्यों सूरज सब ठीक-ठाक तो है तुम और तुम्हारी पत्नी इतनी धूप में मेहनत कर रहे हो और इस बार कौन सी फसल उगा रहे हो |



सूरज

भाई और कोई चारा भी तो नहीं है कालिदास जी लगता है इस बार बारिश नहीं होगी तो इस बार हम लोग तरबूज का फसल उगा रहे हैं |



कालिदास

भाई वाह इस बार तो बहुत बढ़िया सोचा है आपने भाई से भी दूसरे गांव से ज्यादा अपने गांव में गर्मी करती हैं भाई तुम दोनों मेहनत तो बहुत खूब करते हो पर आखिर में बचता क्या है |

लेकिन मेरे पास तुम लोगों के लिए एक बहुत ही बढ़िया उपाय है जिससे तुम्हें मेहनत नहीं करनी पड़ेगी और तुम बैठे-बैठे खा सकते हो |अगर तुम कहो तो बताऊं ?



सूरज

अरे हां कालिदास भैया बताओ बताओ अगर मुझे पसंद आया तो मैं जरूर करूंगा |



कालिदास 

हां भाई सूरज मैं अभी बताता हूं मेरा जो साला नहीं है वह कल ही शहर से आया है और वह एक फैक्ट्री लगाना चाहते हैं | और उसके लिए जमीन देख रहा है और वो उसने तुम्हारा जमीन देखा है और उसे तुम्हारा जमीन बहुत ही पसंद आया है | अगर तुम कहो तो मैं अपने साले से बोल कर तुम्हें इस जमीन का बहुत अच्छी कीमत दिला सकता हूं बस तुम इस जमीन को मुझे भेज दो और जिंदगी भर आराम से बैठ कर खाओ क्या बोलते हो तुम ?



सूरज

देखिए कालिदास जी आपके बारे में सारा गांव जानता है मैं तो सिर्फ आपका लिहाज कर कर आपका लिहाज कर रहा था हम किसान हैं हम कमा कर ही खाते हैं और दूसरों को भी खिलाते हैं आपकी तरह पैसों की लालच में मैं आकर हम अपनी जमीन नहीं बेचेंगे | और हां हमारे कुए का पानी बहुत ठंडा है जाते-जाते उसे पीके जाइएगा |



                  इतना कहकर सूरज ने अपने कुए से पानी निकाल कर दीया | और कालिदास गुस्से से उस मटके को पकड़कर तोड़ दिया और वहां से चला गया और उस साल सूरज की खेत में बहुत अच्छी तरबूज की फसल होगी अपने खेत पर सूरज और चंदा इतनी अच्छी फसल देखकर बहुत खुश हुए



 सूरज

भाई इस बार तो फसल बेचकर जो पैसे आएंगे उन पैसों से इस साल में तुम्हारे लिए कंगन बनवा लूंगा |



चंदा

भाई वाह मैंने कंगन की फरमाइश बहुत पहले की थी और वह बात आपको अब तक याद है |



                 देखते ही देखते कई दिन बीत गए और कितने दिन बीतने के बाद भी सूरज का फसल खरीदने के लिए कोई भी नहीं |सूरज परेशान होने लगा कालिदास सूरज के पास आया और सूरज को बोला



कालिदास

कैसे हो सूरज सब कुशल मंगल तो हैं कि नहीं और तुम्हारे फसल कैसी हैं और उसे कोई खरीदने के लिए आया है या नहीं  ?

अरे कैसे कोई खरीदेगा तुमने मेरी बेज्जती की थी ना भूल गए क्या लेकिन मैं इस बात को कैसे भूल सकता हूं इसीलिए मैंने ही सभी व कार्यों को तुम्हारा फसल लेने के लिए सख्त से सख्त मना किया है |



                 उसके बाद कालिदास वहां से चला जाता है और इधर सूरज बेचारा उदास वहीं पर बैठा रहता है और फिर शाम होते ही सूरज घर के लिए निकलता है घर पहुंचने के बाद सूरज यह बात अपनी पत्नी को बताता है | चंदा इस बात को सुनकर कुछ सोचने लगती हैं और थोड़ी देर तक सोचने के बाद चंदा अपने पति को एक सुझाव देती हैं |



चंदा

अगर कालिदास जी ने सभी व्यापारियों से हमारी फसल को लेने से मना कर दिया है | तो हम एक जूस का दुकान खोलेंगे और वैसे भी हमारे गांव मैं दूसरे गांव से बहुत ज्यादा गर्मी करती है तो हमारा जूस का व्यापार बहुत अच्छा चलेगा |



               इतना कहकर दोनों पति-पत्नी मिलकर एक जूस का दुकान खोल देते हैं धीरे-धीरे उन दोनों की दुकान बहुत चलने लगी और यहां सब देख कर इधर कालिदास जलन जलन के मारे पागल हो जाता है और इधर सूरज और उसकी पत्नी हंसी-खुशी रहने लग जाते हैं |





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आप सभी का मेरे यूट्यूब वीडियो और इस पोस्ट को पढ़ने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद हो सके तो आप मेरे सेकंड साइट साइट को भी सपोर्ट करें और मेरे यूट्यूब वीडियो देखने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद

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