जादुई मुर्गी की पेड़
एक गांव में मुर्गी की दुकान थी और उसके मालिक का नाम लाला था | और उसके पास एक नौकर काम किया करता था और उस नौकर का नाम लड्डू था | लड्डू रोज मुर्गियों को पकड़कर साइकल से लाया करता था उन मुर्गियों को दुकान पर रखकर काट काट कर बेचा करता था | और लाला काउंटर पर बैठकर पैसे गिनने के अलावा और कुछ भी काम नहीं किया करता था | ऊपर से लड्डू को भी ठीक से तनख्वाह नहीं दिया करता था जब लड्डू दुकान में नहीं होता था तब लाला की पत्नी रोज दुकान मैं आकर चिकन लेकर वहां से चली जाती थी |शाम को लाला चिकन को गिन रहा है वैसे नाटक कर कर |
लाला
अबे चिकन कैसे कम है चोरी कर रहे हो क्या इज्जत से पूछ रहा हूं बता दे नहीं तो यह पैसे मैं तेरे ही तनख्वाह से काटलूंगा |
लड्डू
सेठ मुझे नहीं पता सेठ की रोज ना जाने कैसे एक चिकन गायब हो जाता है और आप मेरी तनख्वाह एक-एक करके मत काटिए सेट प्लीज |
लाला
क्या रे चोरी करके भोला बन रहा है तू ही मुर्गी चोरी कर कर कहीं और बेचा करता है |
इतना बोलते हुए लाला ने लड्डू को मारा | एक दिन लाला अपनी पत्नी को चिकन दे रहा था तब वहां पर लड्डू अचानक से आ गया | लाला अपनी पत्नी से बोला
लाला
अरे वो लड्डू के आने से पहले इसे लेकर चली जाओ यहां से जल्दी |
लड्डू
सेठ क्या है ? यह सब अच्छा तो आप रोज चिकन की चोरी करते हो और इल्जाम मुझ पर डाल रहे हो यह गलत है प्लीज मेरे तनख्वाह से कटे हुए पैसे मुझे वापस कर दो |
लाला
अरे मेरे दुकान में मुझे चोरी करने की क्या जरूरत है पागल आज से तुम्हारा यहां कोई काम नहीं है चलो निकलो यहां से |
इतना कहकर वहां से उसे भगा दिया | उसके कारण बेचारा लड्डू किसी और काम के लिए किसी और गांव मैं निकल गया | चलते चलते रास्ते पर एक पेड़ के पास रुका भूख से बेचारा पेट पकड़ कर बैठा ही था तभी उसके पीछे वाले एक जादुई पेड़ ने बोला |
जादुई पेड़
बेटा भूख लग रही है तो उस मटके का पानी मुझ पर डालो |
उसके बाद लड्डू कुछ सोच कर उस मटके का पानी उस जादुई पेड़ पर डालने लगा | उस पेड़ पर पानी डालते ही उस पेड़ पर समोसे उग आए फिर जादुई पेड़ ने बोला |
जादुई पेड़
बेटा तुम्हें जितना समोसे चाहिए तुम्हारा पेट भरने के लिए तुम ले सकते हो और अपनी भूख मिटाओ |
तब लड्डू उस समोसे को तोड़कर खाने लगा उसके बाद वहीं पर बैठ गया |
जादुई पेड़
बेटा मैं तुम्हारे साथ जो अन्याय हुआ है वह मुझे पता है इसीलिए मैं तुम्हारी मदद करनी चाहती हूं |
लड्डू
हे जादुई पेड़ भला तुम कैसे मेरी मदद कर सकते हो तुम तो एक पेड़ हो |
जादुई पेड़
मैं तुम्हें मुर्गी दे सकता हूं अगर तुम मुझे 1 दिन में एक मटका पानी रोजाना डालोगे तो मैं तुम्हें रोज मुर्गी दे सकती हूं | और वह भी ट्राई कर कर और उन्हें तुम बेचकर व्यापार कर और आराम से जियो और हां अगर तुमने लालच में आकर मुझ पर ज्यादा पानी डालोगे तो तुम्हारा ही नुकसान होगा देख कर
इतना कहने के बाद पेड़ पर चिकन फ्राई लगे फिर लड्डू उन्हें तोड़ कर चला गया | लड्डू ने लाला के दुकान के सामने ही अपनी दुकान खोली फिर सारे लोग वहां आकर उसकी तारीफ करते थे | यह देखकर लाला दंग रह गया खीर लड्डू रोज उस पेड़ पर पानी डालकर चिकन ले जाने लगा और उसे बेचने लगा और ऊपर से वह स्वादिष्ट होने के कारण लोगों को वह बहुत पसंद आने लगा | और जो ग्राहक लाला के पास जाते थे वह लाला की दुकान पर आना बंद कर दिए |
लाला
अरे जब इसे मैंने निकाला था तब तो इसके पास खाने को भी पैसे नहीं थे ऐसे में पैसे डाल कर मुर्गियां कहां से ला रहा है मुझे इस राज्य का पता लगाना होगा|
यू सोचकर लाला अगले दिन लड्डू का पीछा करने लगा | लड्डू का यू पेड़ पर पानी डालना और चिकन ना सब देखा |
लाला
हां तो यह है इसका राज पागल को अकल भी नहीं है रोज-रोज थोड़ा थोड़ा चिकन लाकर दुकान में बेचता है | वही अगर मैं होता तो एक ही साथ बहुत सारे चिकन लाता और बहुत सारे ब्रांच एस ओपन करता था और खूब पैसे कमाता |
यू सोचने के बाद लाला लड्डू के जाते ही एक मोटर से पानी डालना शुरू कर दिया | लेकिन पेड़ से फ्राई चिकन नहीं आया |
जादुई पेड़
बेटा इतना पानी डालोगे तो मैं मर जाऊंगी बंद करो पानी डालना |
लाला
अपना मुंह बंद करो इज्जत से मुझे भी फ्राई चिकन दे दो वरना मैं पानी डालता ही रहूंगा |
तब पेड़ को बहुत गुस्सा आया अचानक से उस पेड़ से सांप बिच्छू निकले और लाला के पीछे पड़ गए फिर वह वहां से बाप रे बाप रे कहते-कहते भाग गया | और इधर लड्डू आराम से फ्राई चिकन बेचकर खुश रहा |
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